Wednesday, April 20, 2011

उपयुक्त महिती

 *शून्य*
१. निराकार चैतन्यस्वरूप.
 *एक*
१.एक आत्मा-जगदात्मा
२.एक परब्रह्म-अद्वितीय
३.एक मूळ प्रकृती-आदिमाया
४.एक विराट रूप-विश्वरूप.
*दोन*
दोन ग्रहणे-१.चंद्रग्रहण २.सूर्यग्रहण
दोन महाकवी-१.वाल्मिकी २.महर्षी व्यास
दोन महाग्रंथ-१.रामायण २.महाभारत
*तीन*
त्रिमूर्ती-१.ब्रह्मा २.विष्णू ३.महेश
त्रिकांड-१.कर्म २.ज्ञान ३.उपासना
तीन गुण-१.सत्व २.रज ३.तम
तीन तत्वे-१.मन २.बुद्धी ३.अहंकार
त्रिवेणी संगम-१.गंगा २.यमूना ३.सरस्वती
त्रिस्थळी यात्रा-१.प्रयाग(उत्तर-प्रदेश) २.काशी(उत्तर-प्रदेश) ३.गया(बिहार)
तीन काळ-१.वर्तमानकाळ २.भूतकाळ ३.भविष्यकाळ
तीन भूवने-१.स्वर्ग २.मृत्यू ३.पाताळ
तीन ऋणे-१.देवऋण २.ऋषीऋण ३.पितृऋण
ऋषींचे तीन प्रकार-१.ब्रह्मर्षि २.देवर्षि ३.राजर्षि
*साडे तीन*
साडे तीन मुहूर्त-१.गुढीपाडवा.२)विजयादशमी(दसरा) ३.अक्षयतृतीया ४.बलिप्रतिपदा(अर्धा मुहूर्त)
देवीची साडेतीन पीठे-१.तुळजाभवानी २.महालक्ष्मी ३.रेणूका माता ४.सप्तशृंगी(नाशीक) अर्धे पीठ.


*चार*
चार योग-१.कर्मयोग २.भक्तीयोग ३.राजयोग ४.ज्ञानयोग
चार वेद-१.ऋग्वेद २.यजुर्वेद ३.सामवेद ४.अथर्ववेद
चार युगे-१.कृतायुग(कार्तिक शुद्ध नवमीस प्रारंभ)
        २.त्रेतायुग(वैशाख शुद्ध तृतीयेस प्रारंभ)
        ३.द्वापारयुग(माघ वद्य अमावास्येस प्रारंभ)
        ४.कलियुग(भाद्रपद वद्य त्रयोदशीस प्रारंभ)
चातुर्मास-आषाढ शुद्ध एकादशी ते कार्तिक शुद्ध द्वादशी मधला काळ.